Geeta thakur

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कविता दिवस 📖✍🏻

कविता दिवस📖✍🏻


कविता भाषा का एक रूप है, जिसे हर कोई समझाता है। भले ही कोई उस भाषा को बोलता ना हो। कई प्रसिद्ध कवि लोगों को अपने आस पास की दुनियां को देखने का तरीका सिखाने के लिए जाने जाते हैं। यह एक कला है, जो व्यक्ति को जीवन के प्रति अपनी धारणा बदलने के लिए प्रेरित करती है। जो बात कोई व्यक्ति एक साधारण वाक्य से नहीं समझ पाता, कविता उसे समझा देती है। आम जनता में कविता के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए छोटी सभाएं, कवि सम्मेलन आयोजित करते हैं, जबकि स्कूल कालेज अन्य शैक्षिण संसाधन अपने छात्रों के लिए कविता प्रतियोगिता कराती है।


विश्व कविता दिवस थीम (विषय) क्या है?
विश्व कविता दिवस का उद्देश्य प्राचीन भाषाओं के अस्तित्व, दुनियां के विकास और दुनियां के ज्ञानोदय में कविता की भूमिका को याद करना है।

विश्व कविता दिवस सबसे पहले कहां मनाया गया था?

यूनेस्को ने पहली बार 1999 पेरिस में अपने 30वें आम सम्मेलन के दौरान 21 मार्च को विश्व कविता दिवस के रुप में अपनाया। जिनका उद्देश्य काव्यात्मक अभिव्यक्ति के माध्यम से भाषाई विविधता का समर्थन करना। जो भाषा लुप्त हो गई हैं उन भाषाओं को बढ़ावा देना।

जब से ही विश्व कविता दिवस 21 मार्च को पूरे दुनिया में मनाया जाता है।


कविताएं इतनी शक्तिशाली और विशेष है, कि वे किसी व्यक्ति को प्रेरित कर सकती हैं क्योंकि उनकी हर शब्द का एक मजबूत अर्थ होता है।
कविता की शक्ति को कभी काम मत आंकिए क्योंकि इसमें दिलों को पिघलने आत्माओं को प्रेरित करने और बदलाव लाने की क्षमता अधिक होती है।


कविता लिखने से, लोगों के दुनिया को देखने के तरीके को बदला जा सकता है लोगों के बीच संबंधों को सुधार सकते हैं और एक दूसरे के साथ सद्भावना पैदा कर सकते हैं।
कई लोगों के लिए कविता प्रौद्योगिकी और कल का सौंदर्य एक संदेश होता है। अपने मन की भाव अभिव्यक्ति के माध्यम से भाषाई शब्दों को लिखना कविता का रूप होता है।

कविता के माध्यम से हिंदी व्याकरण में बहुत सुधार होता है। कविता चाहे अंग्रेजी में हो चाहे हिंदी भाषा में इसका मकसद अपने दिल के भावों का उद्गम हम लिखते हैं। कविता पढ़ने से मां को बहुत सुकून मिलता है। कई लोग कविताओं को संगीत के माध्यम से अपने सुरों में ढालते हैं और गाते हैं। इससे भाषा का विकास संभव है।
इसीलिए कविता प्राण है संगीत है। ईश्वर की उपासना का एक साधन है।
कविता का जन्म ना होता तो सब निष्प्राण हैं। देवी देवताओं ऋषियों मुनियों की सुंदर भाषा की देन है कविता।


गीता ठाकुर दिल्ली से
स्वैच्छिक प्रतियोगिता हेतु लेख

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7 Comments

Gunjan Kamal

09-Apr-2024 10:48 PM

शानदार

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Babita patel

30-Mar-2024 09:48 AM

V nice

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Varsha_Upadhyay

23-Mar-2024 10:58 PM

Nice

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